चिंताग्रस्त परिवारजन के लिए यात्रा कैसे प्लान करें

चिंताग्रस्त व्यक्ति की यात्रा में उनकी आवश्यकताओं को समझना, डिटेल्ड प्लानिंग और उन्हें कंट्रोल देना सबसे जरूरी है। हर स्टेप को छोटे भागों में बांटें और बैकअप ऑप्शन्स रखें।

  1. उनकी चिंता के कारणों को समझें. पहले जानें कि वो किस चीज़ से डरते हैं - फ्लाइट, भीड़, नई जगह या फिर भाषा की समस्या। इसे जानकर ही प्लानिंग करें।
  2. मिलकर प्लानिंग करें. उन्हें प्लानिंग में शामिल करें। होटल, रूट, एक्टिविटीज़ चुनने में उनकी राय लें। कंट्रोल की फीलिंग से चिंता कम होती है।
  3. डिटेल्ड इटिनेरेरी बनाएं. दिन-प्रतिदिन का पूरा शेड्यूल बनाएं। फ्लाइट टाइमिंग, होटल एड्रेस, फोन नंबर, लोकल ट्रांसपोर्ट - सब कुछ लिखकर रखें।
  4. कम्फर्ट आइटम्स पैक करें. उनकी पसंदीदा चाय, दवाइयां, कुछ घर का खाना पैक करें। जाना-पहचाना सामान देखकर मन शांत होता है।
  5. फ्लेक्सिबल बुकिंग करें. कैंसिलेशन और चेंज की सुविधा वाली टिकट लें। अगर वो आखिरी वक्त में मना कर दें तो पैसा न फंसे।
  6. लोकल कॉन्टैक्ट्स रखें. डेस्टिनेशन पर कोई जाने वाला हो, होटल का नंबर, लोकल टैक्सी ड्राइवर का कॉन्टैक्ट - इमरजेंसी में काम आएगा।
  7. ट्रायल रन करें. अगर लंबी ट्रिप है तो पहले 1-2 दिन की छोटी ट्रिप करके देखें। कॉन्फिडेंस बिल्ड होगा।
अगर वो ट्रिप के दौरान पैनिक अटैक हो जाए तो क्या करें?
शांत रहें, उन्हें सांस लेने की एक्सरसाइज कराएं। पहले से ही डॉक्टर से पूछकर इमरजेंसी दवा साथ रखें। होटल के नजदीकी हॉस्पिटल का एड्रेस भी पता रखें।
कितने दिन पहले से प्लानिंग शुरू करनी चाहिए?
कम से कम 1 महीने पहले। चिंताग्रस्त लोगों को मानसिक तैयारी का वक्त चाहिए। जल्दबाजी में प्लान करने से और टेंशन बढ़ती है।
सोलो ट्रैवल कराना सेफ है या साथ में जाना जरूरी?
पहली बार तो जरूर साथ जाएं। बाद में उनका कॉन्फिडेंस बढ़े तो सोलो ट्रिप की तैयारी करा सकते हैं। इमरजेंसी कॉन्टैक्ट हमेशा साझा करें।