स्थानीय बाज़ारों में दाम कैसे कम कराएं
स्थानीय बाज़ारों में भाव-ताव करना एक कला है जिसमें धैर्य, मुस्कान और थोड़ी सी रणनीति चाहिए। पहले बाज़ार घूमकर कीमतें जान लें, फिर दुकानदार से दोस्ती बनाएं और आराम से बात करें।
- पहले बाज़ार का चक्कर लगाएं. खरीदारी शुरू करने से पहले पूरे बाज़ार में घूमें। 3-4 दुकानों में एक ही चीज़ की कीमत पूछें। इससे आपको पता चल जाएगा कि असली दाम क्या है। कुछ न खरीदें, सिर्फ जानकारी इकट्ठा करें।
- मुस्कराकर बात शुरू करें. दुकानदार से नमस्ते कहें, मुस्कराएं। पहले उनसे बाज़ार या मौसम के बारे में 2-3 बातें करें। जल्दबाज़ी न दिखाएं। भारतीय बाज़ारों में रिश्ता बनाना ज़रूरी है।
- कीमत पूछें और चुप रह जाएं. जब दुकानदार कीमत बताए तो चुप रह जाएं। 5-10 सेकंड इंतज़ार करें। अक्सर वे खुद ही कम कीमत बताने लगते हैं। फिर कहें 'यह तो बहुत ज़्यादा है भाई साहब'।
- आधी कीमत से शुरुआत करें. अगर कुछ 1000 रुपए में मिल रहा है तो आप 500 रुपए बोलें। यह नॉर्मल है। दुकानदार नाराज़ नहीं होंगे। बल्कि यही उम्मीद करते हैं।
- धीरे-धीरे कीमत बढ़ाएं. 500 से 600, फिर 650, फिर 700 इस तरह बढ़ाते जाएं। हर बार 2-3 मिनट रुकें। दुकानदार को लगना चाहिए कि आप सच में सोच रहे हैं।
- चलने का नाटक करें. अगर दाम न मिले तो 'धन्यवाद, मैं थोड़ा और देखकर आता हूं' कहकर चलने लगें। 80% मौकों में दुकानदार आपको रोकेंगे और कम कीमत देंगे।
- एक साथ कई चीज़ें खरीदें. 2-3 चीज़ें एक साथ खरीदें तो 'कॉम्बो डिस्काउंट' मिलता है। कहें 'भाई साहब, तीनों चीज़ें ले रहा हूं, कुछ छूट दे दीजिए'।
- क्या भाव-ताव करना गलत है?
- बिल्कुल नहीं। भारतीय बाज़ारों में यह सामान्य बात है। दुकानदार इसकी उम्मीद करते हैं और पहले से ही दाम बढ़ाकर बताते हैं।
- अगर दुकानदार नाराज़ हो जाए तो क्या करें?
- मुस्कराएं और कहें 'कोई बात नहीं भाई साहब, आपका दाम ही सही है'। फिर चले जाएं। आमतौर पर कोई नाराज़ नहीं होता।
- किन चीज़ों में भाव-ताव नहीं करना चाहिए?
- खाने-पीने की चीज़ों (फल, सब्ज़ी, स्ट्रीट फूड) में ज़्यादा भाव-ताव न करें। ये पहले से ही सस्ती होती हैं।
- कितना समय लगता है एक चीज़ के लिए?
- 5-10 मिनट काफी है। ज़्यादा देर तक भाव-ताव न करें वरना दुकानदार परेशान हो जाएगा।