कैरी-ऑन और चेक्ड लगेज के बीच सही चुनाव कैसे करें
यात्रा की अवधि, एयरलाइन की फीस, और आपके सामान की प्रकृति के आधार पर तय करें। 3-4 दिन की छोटी यात्रा के लिए कैरी-ऑन बेहतर है, लंबी यात्रा या ज्यादा सामान के लिए चेक्ड बैग चुनें।
- यात्रा की अवधि देखें. 3 दिन तक की यात्रा के लिए कैरी-ऑन काफी है। 7 दिन से ज्यादा की यात्रा के लिए चेक्ड बैग लें। 4-6 दिन की यात्रा में दोनों में से कोई भी काम आ सकता है।
- सामान की प्रकृति चेक करें. तरल पदार्थ 100ml से ज्यादा हैं, नेल कटर/कैंची है, या गिफ्ट्स हैं तो चेक्ड बैग लें। सिर्फ कपड़े और electronics हैं तो कैरी-ऑन ठीक है।
- एयरलाइन की फीस कैलकुलेट करें. इंडिगो/स्पाइसजेट में चेक्ड बैग फीस ₹1200-2500 तक। एयर इंडिया में डोमेस्टिक फ्लाइट में 15kg फ्री। इंटरनेशनल में ज्यादातर एयरलाइन में 20-23kg फ्री मिलता है।
- कनेक्टिंग फ्लाइट का फैक्टर. कनेक्टिंग फ्लाइट है तो कैरी-ऑन सेफ है। चेक्ड बैग छूटने या देर से आने का रिस्क है, खासकर अलग-अलग एयरलाइन की फ्लाइट में।
- वापसी में शॉपिंग का प्लान. शॉपिंग करने का प्लान है तो जाते वक्त कैरी-ऑन ले जाएं, वापसी में चेक्ड बैग बुक करें। या एक्स्ट्रा स्पेस के लिए शुरू से ही चेक्ड बैग लें।
- कैरी-ऑन का साइज़ लिमिट क्या है?
- भारतीय एयरलाइन में आमतौर पर 55cm x 35cm x 25cm और 7kg तक। इंटरनेशनल में थोड़ा अलग हो सकता है।
- चेक्ड बैग में पावर बैंक ले जा सकते हैं?
- नहीं। लिथियम बैटरी वाले सभी आइटम (पावर बैंक, लैपटॉप, फोन) सिर्फ कैरी-ऑन में ही ले जा सकते हैं।
- अगर चेक्ड बैग खो जाए तो क्या करें?
- तुरंत एयरपोर्ट पर बैगेज क्लेम रिपोर्ट फाइल करें। एयरलाइन को 21 दिन का टाइम मिलता है ढूंढने के लिए। कंपेंसेशन मिल सकता है।
- दोनों ऑप्शन एक साथ ले सकते हैं?
- हां, कैरी-ऑन + चेक्ड बैग दोनों ले सकते हैं। इंपोर्टेंट सामान कैरी-ऑन में रखें, बाकी चेक्ड में।